सत्य और पवित्रता का महापर्व है रक्षाबंधन – अखिलेश दीदी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र मगरलोड के योगशक्ति भवन में भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का महापर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड – प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र मगरलोड के योगशक्ति भवन में भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का महापर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । इस अवसर पर योग शक्ति भवन में प्रातः 7:30 बजे मुरली क्लास के बाद सेवाकेंद्र संचालिका राज योगिनी बी के अखिलेश दीदी द्वारा रक्षाबंधन पर्व का आध्यात्मिक रहस्य बताया गया ।उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन सत्य और पवित्रता का महापर्व है । भगवान को सब लोगों ने बांधा कन्याओं ने, माताओं ने, भक्तों ने, ज्ञानियों ने । किसी ने रस्सी से, ओखली से, प्यार से, बातों से , वचन लेकर बांधा, किंतु भगवान बंधते हैं प्रेम से, स्नेह और विश्वास की डोरी से । रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते हैं। माथे पर अक्षत और चंदन का टीका लगाते हैं। अक्षत सादगी और अखंड पवित्रता का प्रतीक तथा चंदन शीतलता व खुशबू का प्रतीक होता है अर्थात हमारा जीवन सादगी पूर्ण हो, खुशबूदार हो हमारी आत्मा शांत व शीतल रहे । इसी प्रकार बहनें अपने भाई की आरती उतार कर कहती हैं कि यह प्रकाश रूपी आत्मा की चमक कभी कम ना हो, दीपक की लौ की तरह अखंड चमकती रहे । अंत में मुंह मीठा करने का तात्पर्य है कि आप की जुबान से सदैव मीठी वाणी का उद्घोष हो । आत्मा रूप में सभी मानव भाई- भाई हैं । अतः एक दूसरे की रक्षा का कर्तव्य हम सब का बनता है और यही रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ है ।
कार्यक्रम के अंत में दीदी जी व संस्था की बी के देवी बहन, बी के गीतांजलि , बी के पार्वती, बी के कंचन बहन ने कार्यक्रम में उपस्थित सैकड़ों माताओं, भाइयों एवं बहनों को रक्षा सूत्र बांधकर, माथे तिलक लगाकर मुंह मीठा कराये । दीदी जी ने आत्मिक शांति के लिए इस क्षेत्र के बहनों ,भाइयों से राजयोग मेडिटेशन सीखने व अभ्यास करने की विनम्र अपील किये हैं ।
Author: Toman lal Sinha
Editor In Chief




