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बचत का संस्कार,गुल्लक का उपहार,300 बच्चों को गुल्लक वितरण कर शिक्षक दंपत्ति की अभिनव पहल

बचत का संस्कार,गुल्लक का उपहार,300 बच्चों को गुल्लक वितरण कर शिक्षक दंपत्ति की अभिनव पहल  

तुमनचंद साहू व श्रीमती रंजीता साहू ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मगरलोड के 300 से अधिक बच्चों को गुल्लक का उपहार दिए

टोमन लाल सिन्हा 

धमतरी/मगरलोडमैं हूं गुल्लक  नाम से गुल्लक मिशन चलाकर बचत के प्रति स्कूली बच्चों को प्रेरित करने वाले श्री तुमनचंद साहू व श्रीमती रंजीता साहू ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मगरलोड के 300 से अधिक बच्चों को गुल्लक का उपहार दिए.

गुल्लक पाकर सारे बच्चे बड़े प्रसन्न व उत्साहित नजर आए. इस अवसर पर स्टाफ के समस्त शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को भी गुल्लक भेंट किया गया. गुल्लक बच्चों में बचत की प्रवृत्ति पैदा करने का बहुत ही कारगर माध्यम है. गुल्लक मिशन के प्रणेता तुमनचंद साहू ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बच्चों की छोटी छोटी बचत जब बड़ी राशि के रूप में संग्रहित हो जाती है तब बच्चे उसका उपयोग अपने मनचाही चीज खरीदने के लिए कर सकते हैं.

कुछ बच्चे अपने पढ़ाई लिखाई के लिए आवश्यक सामग्री खरीदते हैं. गरीब परिवार के बच्चे थोड़ी-थोड़ी बचत करके अपने लिए गणवेश, जूता चप्पल,पुस्तक कॉपी पेन,घड़ी जैसे जरूरत की चीजों को खरीद सकते हैं. जिससे माता पिता का आर्थिक भार कम हो जाता है.कुछ बच्चे इस पैसे का उपयोग सामाजिक, धार्मिक व अन्य परोपकार के कार्य के लिए भी कर सकते हैं.धर्म के लिए अर्थ का होना जरूरी है. बच्चे अपने बचत के पैसों को किसी जरूरतमंद को दान करके या प्रकृति व पर्यावरण के सुरक्षा में खर्च करके धर्म लाभ ले सकते हैं.

        संस्था के प्राचार्य आत्माराम साहू ने तुमनचंद साहू व श्रीमती रंजीता साहू के गुल्लक मिशन की सराहना करते हुए कहा कि पहले आज के जैसे बैंकिंग का जमाना नहीं था तब बच्चे गुल्लक में सिक्के इकठ्ठे करते थे.आजकल बैंकिंग का जमाना है, लोग अपने नाबालिक बच्चों के नाम पर भी खाता संचालित करते हैं. ऐसे समय में कोई सोचा भी नहीं था कि मैं हूँ गुल्लक, एक मिशन का रूप धारण कर करेगा. यह इतना सकारात्मक है कि कुम्हारों के व्यवसाय में भी वृद्धि हो रही है.बच्चे फिजूलखर्ची छोड़कर बचत की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.

किसी अर्थशास्त्री ने कहा है कि पैसा बचाना भी पैसा कमाना है. स्कूली बच्चे पैसा तो नहीं कमा सकते लेकिन मिले हुए पैसों को बचाकर पैसा कमाने जैसा ही काम कर सकते हैं. श्री साहू दम्पति का यह आइडिया कई स्कूलों के माध्यम से मीडिया में खूब प्रचार प्रसार पाया है. तुमनचंद साहू ज़ी का काम करने का अंदाज बहुत निराला होता है. उनकी सेवा भावना दूसरों के लिए प्रेरणा है. विद्यालय परिवार की ओर से उन्हें विशेष बधाई व शुभकामनाएँ देते हैं

   विद्यालय के गुल्लक वितरण कार्यक्रम में समस्त स्टाफ सहित समस्त बच्चों ने मैं हूं गुल्लक तथा पइसा बचाबो, पइसा कमाबो का नारा लगाकर पूरे वातावरण को जोश से भर दिया. सारे बच्चे नए सत्र में स्कूल खुलने से पहले अपने जरूरत के लिए गुल्लक में पैसा जमा करने का संकल्प लिये.

Toman lal Sinha
Author: Toman lal Sinha

Editor In Chief

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