पूर्व सैनिक ने कारगिल युद्ध के अनुभव को किया साझा , विद्यार्थियों ने जाना सैनिकों के शौर्य और बलिदान का इतिहास
यशवंतराव मेघावाले शासकीय महाविद्यालय मगरलोड में कारगिल विजय दिवस का आयोजन
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड – यशवंतराव मेघावाले शासकीय महाविद्यालय, मगरलोड में प्राचार्य डॉ. प्रभा वेरुलकर के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में कारगिल विजय दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारतीय सैनिकों के साहस तथा राष्ट्र के लिए उनके त्याग और समर्पण से अवगत कराना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के लैब टेक्नीशियन एवं पूर्व सैनिक श्री केदारनाथ सोनी रहे। उन्होंने अपने सैनिक जीवन के अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ विस्तारपूर्वक साझा किया। उन्होंने सेना में रहते हुए अनुशासन, कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता और देश के प्रति कर्तव्य को सर्वोच्च मानने की भावना पर प्रकाश डाला। उनके द्वारा साझा किए गए अनुभवों ने विद्यार्थियों को सैनिक जीवन की वास्तविक चुनौतियों और देश की सीमाओं की रक्षा में जवानों की भूमिका को करीब से समझने का अवसर प्रदान किया।
श्री सोनी ने कारगिल युद्ध के संदर्भ में बताया कि 1999 में भारतीय सेना ने अत्यंत कठिन भौगोलिक एवं मौसम संबंधी परिस्थितियों के बीच अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए दुर्गम चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया। उन्होंने कहा कि कारगिल की विजय केवल सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि यह भारतीय जवानों के अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल, धैर्य और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर रहकर मातृभूमि की सुरक्षा के लिए निरंतर तत्पर रहते हैं।
मुख्य अतिथि ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर देश की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कार्य को ईमानदारी और जिम्मेदारी से करना भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
ज्ञातव्य है कि 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में भारत की विजय हुई थी, जिसके उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उन वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री निरुपा साहू, सहायक प्राध्यापक (भौतिक शास्त्र) द्वारा किया गया। उन्होंने कारगिल विजय दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. घनश्याम देवांगन, श्री कौसलेश कुमार ध्रुव, डॉ. यशोदा साहू, श्रीमती दिव्या देवांगन, कार्यालयीन कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।