देवार समाज के मृत बंधुओ एवं भगिनियों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद के लोगो ने किया हनुमान चालीसा पाठ
मुगल काल में यह समाज बहुत प्रताड़ित हुए, मुस्लिम समाज में ना जाने के लिए व हिंदू धर्म में बने रहने के लिए सुअर का व्यापार करने लगे
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड – मगरलोड मे स्थित नवीन बाजार पसरा में निवासरत सुधीर देवार के परिजनों के मृत्यु के उपरांत नगर के समाजसेवियों एवं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा मृत सदस्यों के आत्मा की शांति के लिए एवं अन्य परिजनों के दुख सहन हेतु नवीन बाजार पसरा में शोक सभा एवं हनुमान चालीसा का आयोजन किया गया। आज के इस श्रद्धांजलि सभा में मुख्य वक्ता छत्रपाल साहू ने देवार जनजाति के रहन-सहन आहार,बिहार एवं उनका मुगल साम्राज्य में अपने धर्म के प्रति संघर्ष को विस्तार से बताया।मुगल शासन काल में मुसलमान शासक गांव के मुखिया को खरीद लेता था । और गांव का मुखिया पीने के पानी कुंआ , तालाब में गौ मांस डाल देते थे । फिर धोखे से गांव के लोग उस गौ मांस वाले पानी को पी लेते थे । फिर वही मुखिया शाम को गांव में बैठक रखता था , जितने लोग गौ मांस वाले पानी पिए थे उन्हें हिंदू समाज से बहिष्कृत कर देते थे । जो कमजोर मनहस्थिति के थे वह ज्यादातर मुसलमान बन जाते थे । और जो अपने धर्म के प्रति कट्टर थे , वह गांव से बाहर डेरा बना कर खानाबदोस जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो गए । और गांव-गांव , डगर डगर , द्वार द्वार , भटक भटक का जीवन यापन करने लगे । जिन्हें हम छत्तीसगढ़ में देवार जाति के नाम से जानते हैं । अलग-अलग प्रांतो में अलग-अलग जाति के नाम से जाना जाता है । गांव से बाहर डेरा बना कर रहने के बाद भी मुसलमान लोग इन हिंदू भाइयों का पीछा नहीं छोड़े और इनकी बहन बेटी से छेड़छाड़ , बलात्कार करने लगे । बहन बेटी की रक्षा व इज्जत बचाने के लिए ये हिंदू भाई डेरा के अंदर सूअर का पालन करने लगे । सूअर के नजदीक ही बहन बेटी के साथ रात्रि गुजारने लगे , सूअर काटकर उसके खून हाथ पैरों व मस्तक में लगाने लगे । आज भी देवार हिंदू भाई बहन दर-दर का ठोकर खाएं , हिंदू समाज में प्रताड़ित किया गया , फिर भी हिंदुत्व को नहीं त्यागे । चाहते तो ईसाई या मुसलमान बनकर सम्मानजनक जिंदगी जी सकते थे । लेकिन ऐसा नहीं किया ऐसे कट्टर सनातनी देवार हिंदू भाई बहन हमारे वंदनीय है ।आज की इस कार्यक्रम में प्रमुख रूपफनिंद्र जगत,सनत साहू,अजय साहू , निखिलसिन्हा,गोपाल,विष्णु साहू,तिलक साहू,क्षत्रपाल साहू,कुमलेश साहू ,टामेश्वर ठाकुर,राजू राव,दिलीप कोठारी,मुरलीधर जगत,हर्ष साहू,सनी यादव,कामता साहू आदि उपस्थित थे ।
Author: Toman lal Sinha
Editor In Chief



