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“कौन कहता है मरने के बाद यह शरीर किसी काम का नहीं “

कौन कहता है मरने के बाद यह शरीर किसी काम का नहीं “

टोमन लाल सिन्हा 

धमतरी/मगरलोड – संगम साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति मगरलोड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री नोहर लाल साहू को श्रद्धांजलि अर्पित करने संगम सदन कार्यक्रम रखा गया जिसमें उपस्थित साहित्यकारों ने स्वर्गीय श्री नोहर लाल साहू अमरहा जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से बात कही.सर्वप्रथम अधमरहा जी के अभिन्न मित्र ठेकला निवासी कवि पल्टन राम साहू ने बताया कि अधमरहा जी ने जो देखा उसे लिखा.समाज में फैली भ्रांतियों,अंधविश्वासों व कुरीतियों के प्रबल विरोधी थे.इनकी रचनाओं में भी इनके विरोधी स्वर सुने जा सकते हैं. धौराभाठा निवासी गीतकार अशोक साहू ने कहा कि अधमरहा जी का जीवन हम सब सबके लिए प्रेरणादायी है. वह निर्मल व निश्चल व्यक्तित्व के व्यक्ति थे.समिति में भी अपनी बात निर्भीकता के साथ रखते थे. स्पष्टवादिता उनके जीवन का प्रेरक गुण रहा है. श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए करेली छोटी निवासी कवयित्री उशाकिरण निर्मलकर ने कहा कि अधमरहा जी ने मुझे पिता तुल्य स्नेह से सिंचित करते हुए लेखन के लिए उत्साह वर्धन किया.उनकी कमी सदैव बनी रहेगी.डाभा निवासी साहित्यकार चिंताराम सिन्हा पुजारी ने कहा कि संगम साहित्य समिति की प्रगति में स्वर्गीय नोहर लाल साहू जी का योगदान भूलाया नहीं जा सकता.वे सदैव दायित्व बोध से भरे हुए राष्ट्रप्रेमी व्यक्ति थे.प्रत्येक 15 अगस्त और 26 जनवरी को संगम सदन में तिरंगा फहराने के लिए हसदा से मगरलोड आना हमें उत्साह से भर देता था.गिरोद निवासी युवा साहित्यकार देवनारायण निषाद ने कहा कि अधमरहा जी स्वाभिमानी व्यक्ति थे.स्वाभिमान बेचकर सम्मान लेने वालों में कभी शामिल नहीं रहे.आमाचानी निवासी वरिष्ठ साहित्यकार लीलू दास मानिकपुरी ने कहा कि अधमरहा जी संगम के शुरुआती दौर से अब तक सदैव समर्पित रहे. भले ही वह कम पढ़े लिखे थे लेकिन उनकी समझ का विस्तार बहुत अधिक था.वे सदैव हमारे लिए प्रेरणापुंज बने रहेंगे.उनके जगह की भरपाई स्वयं अधमरा जी ही कर सकते हैं.यादों के इस प्रवाह में संगम साहित्य के अध्यक्ष पुनूराम साहू राज जी अधमरहा जी के यादों में इस कदर डूब गए कि बड़े मुश्किल से खुद को और अपने आंखों में आंसुओं को संभाल पाए.उन्होंने कहा कि संगम के कार्य को संपादित करने में वह मेरे दाहिने हाथ की भूमिका निभाते रहे. उनके बल पर बडा से बड़ा कार्य सरलता पूर्वक संपन्न हो जाता था. प्रयास पत्रिका का संपादन सहयोग, संगम संग्रहालय का रखरखाव, विभूति सम्मान के लिए पात्र व्यक्ति का चयन उनके सहयोग के बिना नहीं हो पता था. संगम को अपना परिवार मानकर सेवा किया. अधमरहा उपनाम के पीछे के कारण को भी बताया .संगम समिति के संरक्षक खैरझिटी निवासी जे आर साहू ने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में अधमरहा जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि संगम समिति के कार्य के लिए वह अपने निजी काम को छोड़ देते थे. मगरलोड के बाहर किसी कार्यक्रम में आने-जाने के लिए वह मेरे साथी व सारथी की भूमिका निभाया करते थे.उनकी स्कूली पढ़ाई भले ही कम थी लेकिन भाव व शब्दों को बारीकी से समझते थे.बीमार अवस्था में बिस्तर पकड़ने के बाद भी संगम को याद करते रहे और नए लड़कों से संगम को आगे बढ़ाने के लिए आग्रह किए हैं.अतः संगम की निरंतरता और प्रतिष्ठा को बढ़ाना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी. कार्यक्रम का संचालन करते हुए संगम समिति के सचिव आत्माराम साहू ने स्वर्गीय अधमरहा जी के काव्य संकलन ‘मानसून की पाती ‘के प्रमुख कविताओं का वाचन किया तथा कहा कि मरणोपरांत देहदान कर समाज की कई भ्रांतियां को तोड़कर अपने कृतियों और कर्मों के साथ वे मरकर भी हमारे दिलों में जीवित रहेंगे. साथ ही कहा कि

“जीवन बड़ा अनमोल है इसका सम्मान करके देखो

 मुश्किलें आसान हो जाती है जिद ठान करके देखो

कौन कहता है मरने के बाद शरीर किसी काम का नहीं होता 

  स्व.नोहर लाल साहू जी अधमरहा जैसे देहदान करके देखो”

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लालेश्वर सिन्हा,तामेश्वर ठाकुर, वीरेंद्र सरल, अशोक कुमार ध्रुव भोलाराम सिन्हा,पुरुषोत्तम मारकंडे,भास्कर वर्मा, भोपाल मनी साहू,श्रीमती अनीता गौर,द्रोन कुमार ध्रुव, संतु राम साहू, कामता प्रसाद,जुबेर जिलानी, लिखेश्वर साहू ,चंद्रहास बघेल, भागवत राम खरे ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए.

Toman lal Sinha
Author: Toman lal Sinha

Editor In Chief

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