chhattisgarh samay news

सत्यता,सरलता, स्वच्छता व धैर्यता जैसे गुणों की प्रतिमूर्ति “दादी जानकी” – राज योगिनी अखिलेश दीदी

सत्यता,सरलता, स्वच्छता व धैर्यता जैसे गुणों की प्रतिमूर्ति “दादी जानकी” – राज योगिनी अखिलेश दीदी

टोमन लाल सिन्हा 

धमतरी/मगरलोड- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र मगरलोड में आदि रत्न दादी जानकी जी का चतुर्थ स्मृति दिवस समारोह का आयोजन किया गया। सेवा केंद्र संचालिका राज योगिनी अखिलेश दीदी ने दादी जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दादी जानकी जी सारे विश्व में आध्यात्मिक क्रांति लाने वाली एक विशेष आत्मा थीं। दादी जी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व प्रशासिका थीं।104 वर्ष की आयु तक दादी जी ने सम्पूर्ण विश्व को मातृत्व की पालना दी । दादी जी सत्यता,स्वच्छता,सरलता और धैर्यता जैसे अनेक गुणों की प्रतिमूर्ति थीं।अपना सम्पूर्ण जीवन विश्व कल्याण के लिये ,सर्व आत्माओं की सेवा के लिये समर्पित करने वाली महात्यागी-तपस्वीमूर्त थीं। ऐसी विशेष व्यक्तित्व की धनी दादी जी का जन्म 1916 में अखण्ड भारत के सिंध हैदराबाद में एक आध्यात्मिक परिवार में हुआ था । बाल्यकाल से ही दादी जी भौतिक आकर्षण एवं वैभवों से दूर रहती थीं। 21वर्ष की आयु में संस्था के सम्पर्क में आईं। संस्था के साकार संस्थापक पिताश्री प्रजापिता ब्रह्मा बाबा को देखते ही यह निश्चय कर लिया कि यह मेरे जीवन को श्रेष्ठ बनाने का श्रेष्ठ मार्ग है। उसी समय से दादी में अद्भुत परिवर्तन आता गया । नारी अबला नहीं-नारी शक्ति स्वरूपणी-इस बात को दादी जी ने सिद्ध कर बताया।। यज्ञ के शुरुवात में सभी दादियों ने लगातार 14 वर्ष तपस्या की,परिणाम स्वरुप दादी जी का चेहरा सूर्य के समान प्रकाशित हो गया । ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के पश्चात दादी प्रकाशमणि जी के कुशल प्रशासन में उनके हाथ में हाथ मिलाकर संस्था की सेवाओं को विश्व में चारों ओर फैलाने में दादी जी ने प्रमुख भूमिका निभाई । ईश्वरीय आदेशानुसार 1974 में विदेश सेवा के निमित्त लंदन गईं । विदेश की भाषा न जानते हुए भी ,वहाॅं के रीति-रस्म भिन्न होते हुए भी,रूहानी प्यार के आगे सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आने दी। पश्चिमी जीवन शैली में पूरी तरह डूबे हुए लोगों को भारतीय संस्कृति सिखाना जैसे बहुत मुश्किल कार्य को भी संभव करके दिखाया‌। अपने अनुभव युक्त प्रवचनों से,अपने आदर्श जीवन से हर एक में नया उमंग भरकर लाखों लोगों को जीने की कला सिखाई।दादी जी ने एक महिला होते हुए भी पाॅंचों खण्डों में सौ से अधिक देशों में लाखों किलोमीटर दूर तक सफर किया।निरंतर योग साधना और तपोबल से अपनी बुद्धि को इतना शक्तिशाली बनाया था । जिसके फल स्वरुप 1978 में अमेरिका के टेक्सास युनिवर्सिटी की लेबोरेटरी में आपकी मन की तरंगों की परीक्षण करके दुनियां की सबसे स्थिर बुद्धि वाली महिला की उपाधि देकर सम्मानित किया । तब से लेकर दादी जी की प्रतिभा आध्यात्मिक शक्ति के रुप में विश्व में फैलने लगी।आपकी सेवाओं का आदर करते हुए लंदन की जनता व वहां की ब्रिटिश सरकार के अधिकारीगण ने आपको सम्पूर्ण सहयोग दिया । दादी प्रकाशमणि जी के अव्यक्त होने के पश्चात आपने 27 अगस्त,2007 से संस्था का मुख्य कार्यभार संभाला । सारे भारत में अनेक स्थानों पर भ्रमण करके अपनी वरदानी दृष्टि से,अपने अनुभवयुक्त वचनों से ईश्वरीय अनुभूति कराई ।परमात्मा भी अपने वरदानी हस्तों से दुवाओं से अनन्त शक्तियां भरते थे।ऐसी सेवाओं में मगन रहने वाली,भगवान के दिल में विशेष स्थान प्राप्त करने वाली अमूल्य रत्न,करोडो़ं दिलों में स्थान प्राप्त करने वाली दादी जी अपनी सम्पन्न- सम्पूर्ण कर्मातीत स्थिति को प्राप्त कर 27 मार्च, 2020 को इस भौतिक देह का त्याग कर दिव्य फरिश्ता बनकर फरिश्तों की दुनियां में उड़कर चली गईं। दादी जी की यादगार में शान्तिवन में बहुत सुंन्दर,बहुत प्यार से शक्ति स्तम्भ का निर्माण किया गया है । 

कार्यक्रम में उपस्थित संस्था के सभी भाई बहनों ने ऐसी अनेक विशेषताओं से सम्पन्न दादी जी को कोटि-कोटि नमन एवं स्नेह श्रद्धासुमन अर्पित किये।

Toman lal Sinha
Author: Toman lal Sinha

Editor In Chief

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज