प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र मगरलोड के योग शक्ति भवन में दादी प्रकाशमणि की 19वीं पुण्यतिथि मनाई गई
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड – प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र मगरलोड के योग शक्ति भवन में संस्था की प्रथम मूख्य प्रशासिका राज योगिनी ब्रह्माकुमारी दादी प्रकाशमणि की 19वीं पुण्यतिथि स्मृति दिवस के रूप में आयोजित की गई । इस अवसर पर संस्था के वरिष्ठ भ्राता बी के नंदकुमार ने दादी की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संस्था की शुरुआत ब्रह्मा बाबा ने शिव बाबा के निर्देश पर किया किंतु इसे विकसित करने का काम दादियों ने किया । बाबा से जो भी जिम्मेदारी मिली उसे दादी ने बखूबी निभाया । इसके लिए उन्होंने एक बड़ा लक्ष्य रखा क्योंकि लक्ष्य हीन होकर सफलता प्राप्त नहीं किया जा सकता और वह अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटकी। दादी जी ने कहा योगी जीवन की निशानी है – क्लीन और क्लियर । दादी मन, वचन और कर्म तीनों रूप में डबल अहिंसक थीं । बाबा के हर कथन को श्रीमत मानती थी । दादी के आने से ही यह यज्ञ नैतिक जागरण, देश के उत्थान में बहुत कार्य किया इसके लिए दादी जी को यूनिसेफ, यूएनओ के द्वारा सम्मानित किया गया । ब्रह्मा बाबा या मम्मा के अतिरिक्त यदि हम अपनी दादियों को भी फॉलो करते हैं तो समझो बाबा के श्रीमत पर ही चलते हैं । सेवा केंद्र संचालिका राज योगिनी बीके अखिलेश दीदी ने दादी की जीवन परिचय के साथ-साथ उनके महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादी जी को कृष्ण से बहुत प्यार था । उनके पिताजी ने बचपन में ही उनके योगिनी, तपस्विनी होने की भविष्यवाणी किया था । 1935 में संस्था में आने पर ब्रह्मा बाबा में कृष्ण की प्रतिबिंब देखी ।1950 में पाकिस्तान से माउंट आबू जब संगठन का आना हुआ तब मुंबई, पटना आदि में खूब सेवा किया। दादी जी किसी भी समस्या को बड़ी युक्ति से समाधान करती थी। उनकी विशेषताएं आज भी भारत सहित अन्य देशों में भी नए-नए संस्थानों के रूप में फलीभूत हो रही है । ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद 1969 से 2007 तक लगभग 38 वर्ष संस्था की मुख्य प्रशासिका रही। उनकी दृष्टि जिस पत्थर पर पड़ती वह देवमूर्ति बन जाती । उनका कहना था सब करो लेकिन चार विषयों ज्ञान, योग, धारना, सेवा में कमजोर मत बनो । कार्यक्रम को बीके रामाभाई, डामन भाई ने भी संबोधित किया । अंत में सभी भाई बहनों ने दादीजी को पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि अर्पित किए ।







