निरई माता की दिव्य ज्योति दर्शन करने लगेगा 22 मार्च को 50 हजार पुरुषों का मेला
चैत्र नवरात्रि की प्रथम रविवार को बिना ज्योति जलाई जलता है माता की दिव्य ज्योति
साल में एक बार खुलता है माता का दिव्य दरबार,शराबी रहे सावधान नहीं तो काटेगी मधुमक्खी
बिना तेल घी के जलेगी निरई माता की दिव्य ज्योति
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड –धमतरी जिला की विकासखंड मगरलोड सुदूर वनांचल क्षेत्र गरियाबंद के समीप ग्राम मोहेरा के पहाड़ियों में विराजित माता निरई की दिव्य ज्योति के दर्शन करने आज 22 मार्च को लगभग 50000 पुरुषों का मेला लगेगा जिसमें महिलाओं का प्रवेश पूर्णत वर्जित हैयह मेला प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को लगती है जिसमें मान्यता है कि बिना तेल ज्योति घी का दीपक जलाए माता का दिव्या ज्योति का दर्शन करने सुबह 4 बजे से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगती है जो सुबह 10 बजे तक माता का ज्योति का दर्शन करने लगभग 50,000 पुरुष इस स्थल पर पहुंचते हैं
इस दुर्गम पहाड़ियों में चढ़कर माता के गर्भ गृह में नारियल आस्था के रूप में भेंट किया जाता है इस गर्भ गृह में चढ़ने के लिए दर्शन करने के लिए दुर्गम पहाड़ियों पक डंडियों की रास्तों से ऊंचाइयों तक चढ़ना पड़ता है
ऐसी मान्यता है की शराबियों की यहां खैर नहीं रहती जो भी शराब पीकर माता का दर्शन करने पहुंचते हैं उसे पर मधुमक्खियां का हमला होने की प्रबल संभावना होती है
इस निरई माता की मान्यता है कि भक्तगण बताते हैं की एक समय में निरई माता अपने पुजारी की पत्नी से कुछ संदेह के कारण रुष्ट होकर दरबार में आने के लिए महिलाओं का प्रवेश पूर्णत: मना कर दिया गया तब से आज तक माता की पूजा अर्चना पुरुषों द्वारा की जाती है
यहां बकरों की भी बली भी आस्था के रूप में चढ़ाई जाती है इस निरई माता की दर्शन करने उड़ीसा सीमा से लगे जिला के साथ छत्तीसगढ़ के दुर्ग, धमतरी राजनंदगांव, महासमुंद, रायपुर गरियाबंद, राजीम, फिंगेश्वर, देवभोग ,पिथौरा, बस्तर के लोग यहां माता की दर्शन करने सुबह से ही पहुंचने लगते हैं
धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा पहले ही दौरा कर यहां की मूलभूत सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए सभी प्रकार की उचित व्यवस्था प्रबंध किया गया है सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं