मगरलोड योग शक्ति सेवा केंद्र में रजत जयंती समारोह आयोजित
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड– प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र मगरलोड का 25वां स्थापना दिवस रजत जयंती वर्ष के रूप में संस्था के योग शक्ति भवन में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया । इस अवसर पर सेवा केंद्र से जुड़े सैकड़ों भाई बहन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सेवाकेंद्र संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अखिलेश दीदी एवं वरिष्ठ भाई बहनों के करकमलों से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बी के अखिलेश दीदी ने कहा कि जिस प्रकार भागीरथी ने अथक प्रयास से गंगा को इस धरती पर लाया उसी प्रकार शिव परमात्मा ने मगरलोड की इस पावन धरा में ज्ञान की गंगा अर्थात अविनाशी रूद्र गीता ज्ञान यज्ञ की स्थापना किया है। आज से ठीक 25 वर्ष पूर्व 12 मई 2001को मगरलोड में गीता ज्ञान यज्ञ का बीजारोपण हुआ, जो अब एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। आज का दिन हम ब्राह्मणों के लिए बड़े ही गर्व का दिन है। शिव बाबा ने हमें राजाओं का राजा बनाया, नया जीवन दिया, सभी प्रकार की खुशियां दी, इसलिए हम बहुत ही भाग्यशाली हैं। यज्ञ ब्राह्मण के बिना आगे नहीं बढ़ सकता । यहां के ब्राह्मण बच्चों ने यज्ञ को आगे बढ़ाने में बढ़- चढ़कर सहयोग प्रदान किया है। बी के नारायण भाई ने कहा कि यह अविनाशी रूद्र ज्ञान यज्ञ है जिसमें स्थूल सामग्री का नहीं, बल्कि सूक्ष्म मनोविकारों का स्वाहा करते हैं और हम मनुष्य से देवता बनते हैं। बी के भ्राता जितेंद्र ने यज्ञ के स्थापना के समय की स्थिति-परिस्थिति का अपना अनुभव साझा किया और बताया कि यहां का ज्ञान खुद की उन्नति के लिए है। बी के डामन भाई ने कहा कि यह यज्ञ एक ईश्वरीय विश्वविद्यालय है जो सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं है वरन् यहां चरित्र का भी निर्माण होता है। कलियुगी दूनिया के इस अशांत वातावरण में मेडिटेशन के माध्यम से आत्मिक शांति प्राप्त करने की सहज युक्ति यहां सिखायी जाती है। इसी क्रम में भ्राता लोमसिंह व भ्राता दौलत ध्रुव ने भी अपना अनुभव साझा किए। बी के भ्राता रोमेश व सुशीला बहन ने सुमधुर गीत तथा बी के रागिनी व का स्मिता ने नृत्य प्रस्तुत किए। अंत में बोर्ड परीक्षा में स्थान बनाने वाले बच्चों को सौगात देकर सम्मानित किया गया।
Author: Toman lal Sinha
Editor In Chief




