40 लाख की ठगी FIR के 110 दिन बाद जागी मगरलोड पुलिस, दो की गिरफ्तारी के बाद भी फर्जी दस्तावेज़ गिरोह के ‘आकाओं’ पर मेहरबान!
“एसपी धमतरी श्रीमती भावना पांडेय के निर्देश पर फर्जी दस्तावेजों से 40 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा – मुख्य आरोपी सहित 02 आरोपी गिरफ्तार”
“मृतक की 4.5 एकड़ कृषि भूमि को अपना बताकर बेचने की कोशिश, फर्जी ऋण पुस्तिका एवं आधार कार्ड से रचा गया षडयंत्र”
मगरलोड – मगरलोड पुलिस की 110 दिन बाद प्रभावी विवेचना में कूटरचित दस्तावेजों का खुलासा – फर्जी दस्तावेज, चेक, रबर सील एवं नगदी बरामद
पुलिस अधीक्षक धमतरी श्रीमती भावना पांडेय के निर्देशन में जिले में धोखाधड़ी, कूटरचना एवं आपराधिक षडयंत्र के मामलों में प्रभावी कार्रवाई हेतु दिए गए निर्देशों के तहत थाना मगरलोड पुलिस द्वारा अपराध क्रमांक 77/2026, धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 238 बीएनएस के प्रकरण में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करते हुए मुख्य आरोपी सहित 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रार्थी सचिन बगानी, निवासी गोबरा नवापारा द्वारा थाना मगरलोड में शिकायत प्रस्तुत की गई थी कि आरोपी ठाकुर राम साहू द्वारा मृतक विष्णु प्रसाद साहू के नाम ग्राम सोंगा वि ख मगरलोड में स्थित लगभग 4.5 एकड़ कृषि भूमि को अपना बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए तथा उक्त भूमि को बेचने के नाम पर प्रार्थी से विभिन्न माध्यमों से नगद एवं चेक के जरिए लगभग 40 लाख रुपये प्राप्त किए गए।
शिकायत पर थाना मगरलोड में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
▪️ फर्जी दस्तावेज तैयार कर रचा गया षडयंत्र
विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा मृतक विष्णु प्रसाद साहू के नाम से तैयार किए गए डीसीबी बैंक शाखा कुर्रा नयापारा के खाता क्र. के ग्राहक आवेदन फार्म, संलग्न दस्तावेज एवं बैंक स्टेटमेंट प्राप्त कर जांच की गई।
जांच एवं पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों द्वारा अवैध लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से मृतक के नाम पर फर्जी ऋण पुस्तिका, आधार कार्ड एवं बैंक संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए थे। आरोपीगण द्वारा कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से कृषि भूमि पर अपना अधिकार दर्शाकर उसे बेचने का प्रयास किया गया।
विवेचना में आरोपी ठाकुर राम साहू द्वारा अपने सहयोगी आरोपी जितेन्द्र साहू के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्रपूर्वक फर्जी दस्तावेज तैयार करने एवं उनका उपयोग करने की जानकारी सामने आई।
▪️ आरोपियों की निशानदेही पर महत्वपूर्ण सामग्री बरामद
पुलिस द्वारा आरोपियों के मेमोरण्डम के आधार पर गवाहों की उपस्थिति में निम्न सामग्री बरामद की गई – फर्जी ऋण पुस्तिका, फर्जी आधार कार्ड, 01 नग एटीएम कार्ड, 03 नग चेक, 02 नग रबर सील, लिखावट संबंधी डायरी, 5,200 रूपये नगद
आरोपी ठाकुर राम साहू के लिखावट एवं हस्ताक्षर के नमूने भी विधिवत प्राप्त किए गए हैं, जिन्हें आवश्यक परीक्षण एवं मिलान हेतु क्यूडी शाखा भेजा जाएगा।
गिरफ्तार आरोपी का नाम(01) ठाकुर राम साहू
पिता स्व. रामदीन साहू, उम्र 37 वर्षनिवासी ग्राम सांगा, थाना मगरलोड, जिला धमतरी(छ.ग.)(02) जितेन्द्र साहू पिता श्रीराम साहू, उम्र 38 वर्ष निवासी ग्राम पोखरा, थाना राजिम, जिला गरियाबंद (छ.ग.)
दोनों आरोपियों को एफ आई आर के 110 दिन बाद दिनांक 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराया गया तथा विधिसम्मत कार्यवाही के पश्चात दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।
प्रकरण में आरोपियों द्वारा आपराधिक षडयंत्रपूर्वक कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनका उपयोग कर धोखाधड़ी किए जाने के साक्ष्य मिलने पर धारा 61(2) बीएनएस जोड़ी गई है।
धमतरी पुलिस द्वारा प्रकरण की विवेचना जारी है। फर्जी दस्तावेज तैयार करने, कूटरचना में सहयोग करने तथा पूरे षडयंत्र में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में भी विस्तृत जांच की जा रही है।
अब सवाल ये है कि…
लाखों की ठगी FIR के 110 दिन बाद जागी मगरलोड पुलिस, दो की गिरफ्तारी के बाद भी फर्जी दस्तावेज़ गिरोह के ‘आकाओं’ पर बड़ी कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है
40 लाख की ठगी: मुख्य आरोपी तो सलाखों के पीछे, लेकिन फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाले ‘मास्टरमाइंड’ और मददगारों पर पुलिस क्यों सख्ती नहीं दिखा रही?
मगरलोड पुलिस द्वारा कृषि भूमि के नाम पर 40 लाख की धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी ठाकुर राम साहू उर्फ राजू सोंगा वि ख मगरलोड एवं जमीन दलाल जितेंद्र साहू ग्राम पोखरा राजिम को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पीड़ित सचिन बंगानी की शिकायत पर थाना मगरलोड में अपराध क्रमांक 77/2026 के तहत कूट रचित दस्तावेज़ तैयार करने और ठगी का मामला तो दर्ज कर लिया गया है, लेकिन इस बड़ी साजिश के पीछे छिपे असली चेहरों पर कार्रवाई न होना पुलिस की मंशा पर संदेह पैदा कर रहा है।
सुलगते सवाल: फर्जी आधार और ऋण पुस्तिका बनाने वाले तक क्यों नहीं पहुंची पुलिस?
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि मुख्य आरोपी ठाकुर राम साहू उर्फ राजू ने मृतक विष्णु को जीवित बताकर फर्जी आधार कार्ड और फर्जी ऋण पुस्तिका (लोन बुक) जैसे सरकारी दस्तावेज़ तैयार किए।
बिना किसी विभागीय सांठगांठ या पेशेवर जालसाज के ऐसे संवेदनशील सरकारी दस्तावेज़ जैसे हूबहू तैयार करना मुमकिन नहीं है।
जनता अब यह पूछ रही है कि पुलिस ने मुख्य आरोपी ठाकुर राम साहू उर्फ राजू सोंगा वि.ख. मगरलोड निवासी एवं जमीन दलाल जितेंद्र साहू ग्राम पोखरा राजिम को तो पकड़ लिया, लेकिन फर्जी आधार कार्ड एवं फर्जी ऋण पुस्तिका, शील, बैंक पास बुक बनाने वाले उस कंप्यूटर ऑपरेटर, कियोस्क सेंटर या संभवतः सरकारी विभाग के संदिग्ध कर्मचारी तक हाथ क्यों नहीं बढ़ाए जिसने ये फर्जी दस्तावेज़ बनाकर दिए?
क्या पुलिस इन बड़े मगरमच्छों को बचाना चाहती है? *यदि फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाली फैक्टरी या गिरोह का पर्दाफाश नहीं हुआ, तो ऐसे न जाने कितने और लोग ठगी का शिकार होते रहेंगे।*
👥 सह-आरोपियों और मददगारों को क्यों दी जा रही है राहत?
FIR में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि इस 40 लाख की जालसाजी में मुख्य आरोपी अकेले शामिल नहीं था।
डी.बी.बी. बैंक कुर्रा (गोबरा नवापारा) में फर्जी खाता खुलवाने में अन्य मदद करने वाले अन्य लोग पीड़ित को झांसे में लेने और गवाही की साजिश रचने वाले सहयोगियों को इन सभी नामजद आरोप लगने और मददगारों की भूमिका स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस ने इन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
इन्हें खुली छूट देना और कार्रवाई में ढील बरतना पुलिस की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है।
क्या पुलिस रसूख और प्रभाव के आगे नतमस्तक होकर पीड़ितों को आधा-अधूरा न्याय दे रही है?
क्या केवल गरीबों के लिए सख्त है कानून?
पीड़ित पक्ष को संदेह है कि पुलिस मुख्य साजिशकर्ताओं और सह-आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में जानबूझकर कतरा रही है। यदि कोई रसूखदार इन जालसाजों के पीछे खड़ा है, तो पुलिस प्रशासन को इसका खुलासा करना चाहिए।
आम जनता की मांग है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करे और फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने वाले मुख्य गैंग समेत सभी नामजद सह-आरोपियों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजने चाहिए , ताकि पीड़ितों को पूर्ण न्याय मिल सके।
FIR दर्ज होने के पूरे 110 दिनों के बाद केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी होना वाकई बेहद गंभीर बात है और पुलिस प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली को पूरी तरह उजागर करता है।
इतने लंबे समय (लगभग 4 महीने) तक पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, जिससे मुख्य आरोपियों को सबूत मिटाने और सह-आरोपियों को भूमिगत (फरार) होने का पूरा मौका मिल गया। इस गंभीर देरी और पुलिसिया कार्यवाही पर बड़ी प्रश्न चिन्ह है
लाखों की ठगी FIR के 110 दिन बाद जागी मगरलोड पुलिस, दो की गिरफ्तारी के बाद भी फर्जी दस्तावेज़ गिरोह के ‘आकाओं’ पर मेहरबान क्यों है
कृषि भूमि के नाम पर 40 लाख की हाईप्रोफाइल धोखाधड़ी के मामले में मगरलोड पुलिस की कछुआ चाल और कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। पीड़ित सचिन बंगानी की लिखित शिकायत पर थाना मगरलोड में अपराध क्रमांक 77/2026 के तहत मामला दर्ज होने के पूरे 110 दिनों (लगभग 4 महीने) की लंबी देरी के बाद पुलिस ने केवल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इतनी गंभीर धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में पुलिस की यह कछुआ चाल अपराधियों को संरक्षण देने जैसा अंदेशा पैदा कर रही है।
⏳ 110 दिनों की देरी: पुलिस की मंशा पर उठते सुलगते सवाल*
आम जनता और पीड़ित पक्ष अब पुलिस प्रशासन से सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर 110 दिनों तक पुलिस किस दबाव में बैठी रही?
सबूत मिटाने की छूट : इतने लंबे समय में आरोपियों को कूट रचित दस्तावेज़ों को खुर्द-बुर्द करने और पैसे को ठिकाने लगाने का पूरा वक्त मिल गया।
असरदार लोगों का दबाव ?: क्या पुलिस किसी राजनैतिक या रसूखदार दबाव के कारण कार्रवाई को टालती रही? यदि पीड़ित गरीब या आम आदमी होता, तो क्या पुलिस इसी तरह 4 महीने तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती?
फर्जी आधार और ऋण पुस्तिका बनाने वाले तक क्यों नहीं पहुंची पुलिस?
इस पूरे मामले का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि मुख्य आरोपी ने मृतक को जीवित बताकर अपने नाम पर फर्जी आधार कार्ड और फर्जी ऋण पुस्तिका (लोन बुक) जैसे संवेदनशील सरकारी दस्तावेज़ जैसे तैयार किए।
बिना किसी सरकारी विभाग की सांठगांठ या पेशेवर जालसाज गिरोह के ऐसे फर्जी कागजात तैयार करना नामुमकिन है।
पुलिस ने दो लोगों को तो पकड़ लिया, लेकिन उस फर्जी ऋण पुस्तिका,आधार कार्ड बनाने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर, कियोस्क सेंटर या विभाग के भ्रष्ट कर्मचारी तक हाथ क्यों नहीं बढ़ाए जिसने ये जाली दस्तावेज़ बनाए? क्या पुलिस इस मुख्य गिरोह का पर्दाफाश करने से डर रही है?
👥 नामजद सह-आरोपियों और मददगारों को क्यों दी जा रही है राहत?







