मगरलोड के शासकीय कन्या विद्यालय में सैकड़ों मासूम छात्र छात्राओं की जान पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा
मगरलोड के शासकीय कन्या विद्यालय की बिल्डिंग महज 16 साल में हुई ‘कंडम’
‘कंडम’ हो चुकी छत के नीचे डर के साए में पढ़ने को विवश है बेटियां,
कब जागेगा धमतरी प्रशासन?
सैकड़ों छात्राओं की जान दांव पर, 16 साल में ही जर्जर हुआ मगरलोड का शासकीय कन्या शाला भवन!”
टोमन लाल सिन्हा की खास रिपोर्ट
धमतरी/मगरलोड – शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मगरलोड की मुख्य बिल्डिंग अपनी घटिया निर्माण गुणवत्ता की गवाही दे रही है। अमूमन 50 से 100 साल तक सुरक्षित रहने वाली कंक्रीट (RCC) की यह सरकारी इमारत मात्र 16 वर्षों के भीतर ही पूरी तरह जर्जर और ‘कंडम’ होने की कगार पर पहुंच चुकी है। स्कूल की छत और दीवारों का प्लास्टर बड़े-बड़े टुकड़ों में भरभराकर गिर रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है। भ्रष्टाचार और लापरवाही की खुली गवाही :बिल्डिंग की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और कंक्रीट के भीतर का लोहा (सरिया) जंग खाकर खोखला हो रहा है। दीवारों पर चारों तरफ भयानक सीलन पसरी हुई है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का आरोप है कि निर्माण के समय ठेकेदार और संबंधित विभाग द्वारा भारी भ्रष्टाचार करते हुए घटिया सीमेंट, रेत और सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। निर्माण के बाद भी सालों तक लगातार हो रहे पानी के रिसाव (लीकेज) की अनदेखी की गई, जिसके कारण आज पूरी बिल्डिंग अंदर से खोखली हो चुकी है। मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक? इस जर्जर हो चुकी सरकारी इमारत के नीचे रोजाना सैकड़ों छात्र छात्राएं बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। सिर के ऊपर लटकता मौत का यह साया प्रशासन की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है। क्या विभाग और शासन किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
प्रशासन से प्रमुख मांगें:
सुरक्षा सर्वोपरि : जर्जर कमरों और खंडहर हो रही बिल्डिंग में लग रही क्लासों को तुरंत किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट: लोक निर्माण विभाग (PWD) के उच्च अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से इस पूरी बिल्डिंग का तुरंत ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ करवाया जाए।
दोषियों पर कार्रवाई
महज 16 साल में स्कूल की यह हालत करने वाले तत्कालीन ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।अभिभावकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे बच्चों की जान की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को विवश होंगे।
“212 छात्र छात्राओं की जान दांव पर, 16 साल में ही जर्जर हुआ मगरलोड का शासकीय कन्या शाला भवन!”
‘कंडम’ हो चुकी छत के नीचे डर के साए में पढ़ने को विवश बेटियां, कब जागेगा धमतरी प्रशासन,छत्तीसगढ़ सरकार एक तरफ ‘ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ‘ और शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक मुख्यालय से एक बेहद डरावनी और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है।
यहाँ संचालित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (यू-डाइस कोड: 22132700120) का भवन वर्तमान में साक्षात मौत का कुआं बन चुका है। महज 16 साल पहले (वर्ष 2008 में भूमि पूजन संभवतः 2010 में निर्माण ) बनी इस सरकारी स्कूल बिल्डिंग की हालत आज इतनी बदतर है कि यहाँ पढ़ने वाली 212 छात्राओं के सिर पर हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता है।
क्लासरूम में बैठते ही ऊपर दिखता है नंगा सरिया, कभी भी गिर सकता है मलबा
विद्यालय के कमरों की स्थिति को देखकर रूह कांप जाती है। छत का प्लास्टर बड़े-बड़े टुकड़ों में टूटकर नीचे गिर रहा है और कंक्रीट के अंदर का जंग लगा सरिया साफ दिखाई दे रहा है। दीवारों की पपड़ियां उखड़ चुकी हैं और पूरी बिल्डिंग सीलन की वजह से जर्जर हो चुकी है। छात्राओं का कहना है कि जब वे क्लास में पढ़ती हैं, तो उनका ध्यान ब्लैकबोर्ड से ज्यादा छत पर होता है कि कहीं कोई बड़ा हिस्सा उनके सिर पर न गिर जाए।
पालकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रशासन शायद यहाँ किसी बड़ी दुर्घटना या मासूम छात्र,छात्राओं की जान जाने का इंतजार कर रहा है, तभी तो इतनी गंभीर स्थिति के बाद भी आंखें मूंदे बैठा है।
16 साल में ही बिल्डिंग ‘कंडम’, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भवन निर्माण की गुणवत्ता पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। जो सरकारी इमारतें दशकों तक अडिग रहती हैं, वह महज 16 साल में इस कदर खंडहर कैसे हो गईं? यह सीधे तौर पर निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। इतने वर्षों में न तो शिक्षा विभाग ने इसकी सुध ली और न ही लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस कदम उठाए।
पालकों और शाला समिति की चेतावनी: ‘वैकल्पिक व्यवस्था हो, नहीं तो होगा चक्काजाम’बढ़ते खतरे को देखते हुए शाला प्रबंधन समिति (SMC) और पालकों ने साफ कह दिया है कि अब वे अपनी बेटियों को इस ‘मौत की इमारत’ में भेजने को तैयार नहीं हैं। पालकों ने जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से मांग की है कि है की तत्काल इस जर्जर भवन का तकनीकी मुआयना कर इसे असुरक्षित (कंडम) घोषित किया जाए।छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत किसी अन्य सुरक्षित सरकारी या सामुदायिक भवन में कक्षाएं शिफ्ट की जाएं।नए सुरक्षित स्कूल भवन के निर्माण के लिए इमरजेंसी फंड जारी किया जाए।पालकों और ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते छात्र,छात्राओं को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया और कोई अप्रिय घटना हुई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी धमतरी जिला प्रशासन की होगी और इसके खिलाफ उग्र आंदोलन व चक्काजाम किया जाएगा
इस जर्जर स्कूल का निरीक्षण करने वालों में शाला विकास समिति के अध्यक्ष मोहन चक्रधारी, विधायक प्रतिनिधि सिहावा रवि कुमार निर्वाण, पलक गण जिसमें राधेश्याम सिन्हा भालूचूआ,गणपत राम सोरी मुडकेरा, खेलन ध्रुव निरई, रंजीत मरकाम गिरहोलाडीह सहित कई पालकगण उपस्थित रहे पालक गणों में इस स्कूल की दशा देख कर काफी आक्रोश है
विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार ध्रुव ने बताया कि इसकी जानकारी उच्च अधिकारी को दे दी गई है जैसे ही दिशा निर्देश दी जाएगी उसके अनुसार उचित कार्यवाही की जाएगी
विधायक प्रतिनिधि रवि कुमार निर्माण ने कहा कि इतनी घटिया जर्जर स्कूल बनाने वाले ठेकेदार संबंधित अधिकारी के ऊपर कारवाई होते हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने के साथ उक्त राशि की वसूली होनी चाहिए
प्राचार्य पनेस कुमार सेन ने बताया की इसकी जानकारी उच्च अधिकारी को दे दी गई है