ओरेकल पब्लिक स्कूल धमतरी एवं भखारा में स्कूली बच्चों ने रचा इतिहास: खुद प्रोग्राम कर नचाया रोबोट, लैपटॉप से डिजाइन कर बनाए 3D उत्पाद और उड़ाए ड्रोन
विद्यार्थियों के लिए ‘स्टेम रोबो हब इंडिया’ की विशेष तकनीकी कार्यशाला संपन्न
‘सीखो और करके देखो’ की अवधारणा पर बच्चों ने खुद तैयार किए रोबोट, स्मार्ट डोर लॉक और ड्रोन किट
टोमन लाल सिन्हा
धमतरी/मगरलोड – भविष्य की आधुनिक तकनीकों से ग्रामीण और अर्ध-शहरी अंचल के बच्चों को रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से भखारा के वार्ड नं. 14 स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मांगलिक भवन में एक भव्य एवं ऐतिहासिक तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। ओरेकल पब्लिक स्कूल धमतरी एवं भखारा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस विशेष कार्यशाला का संचालन ‘स्टेम रोबो हब इंडिया’ के संस्थापक देवव्रत सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया। इस पूरे आयोजन में विद्यालय के डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल, प्राचार्य सोमन् साहू एवं श्रीमती उपमा तिवारी का विशेष सहयोग रहा।
20 से अधिक एडवांस रोबोट्स को बच्चों ने खुद किया नियंत्रित
पूरी तरह से ‘सीखो और करके देखो’ (Hands-on Learning) की थीम पर आधारित इस कार्यशाला में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। विद्यार्थियों ने मानवाकार रोबोट, द्विपाद रोबोट, रोबोटिक आर्म, बाधा पहचानने वाले रोबोट, लाइन फॉलोइंग और वायरलेस नियंत्रित रोबोट सहित 20 से अधिक प्रकार के अत्याधुनिक रोबोट्स को स्वयं संचालित किया। इस दौरान रोबोट रेस, रोबोट फुटबॉल और मैत्रीपूर्ण प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से बच्चों ने सेंसर, मोटर और माइक्रोकंट्रोलर की जटिल कार्यप्रणाली को बेहद आसान तरीके से समझा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कोडिंग का जीवंत रोमांच
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ‘ब्रेन रोबोट’ रहा, जिससे बच्चों ने अपनी पढ़ाई और विभिन्न विषयों से जुड़े सवाल पूछे और रोबोट से तुरंत सटीक जवाब प्राप्त किए। इतना ही नहीं, बच्चों ने ब्लॉक कोडिंग के माध्यम से रोबोट को स्वयं प्रोग्राम कर उसे चलना, नृत्य करना और बोलना सिखाया। वहीं उन्नत एआई-आधारित ‘डॉग रोबोट’ को विद्यार्थियों ने अपनी आवाज के निर्देशों (Voice Commands), रिमोट और मोबाइल ऐप के जरिए दौड़ाकर आधुनिक तकनीक की ताकत को महसूस किया।
3D प्रिंटिंग से सीखी उद्यमिता और बिजनेस की बारीकियां
3डी प्रिंटिंग सत्र में बच्चों ने न सिर्फ तकनीक सीखी, बल्कि भविष्य के उद्यमी (Entrepreneur) बनने का पाठ भी पढ़ा। छात्रों ने लैपटॉप पर खुद 3D डिजाइन तैयार किए और मोबाइल से कमांड देकर 3डी प्रिंटर पर लाइव प्रिंटिंग शुरू की। बच्चों ने स्वयं कस्टम की-रिंग, गृह-मॉडल, लिथोफेन, कस्टम उपहार, दीवार घड़ी, धार्मिक प्रतिमाएँ, आभूषण और कार के पुर्जे तैयार किए। इसके साथ ही रोबोटिक आर्म और मानव कंकाल के 3डी मॉडल्स की असेंबली की गई। विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को इन 3डी उत्पादों के निर्माण से लेकर बाजार में बिक्री और उद्यमिता (Business) की संभावनाओं के बारे में विस्तार से समझाया गया।
आसमान में उड़े DIY ड्रोन, बच्चों ने बनाए कई ‘स्मार्ट प्रोजेक्ट्स‘
ड्रोन सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने एयरोडायनामिक्स और ड्रोन के विभिन्न हिस्सों की कार्यप्रणाली को समझा। बच्चों ने खुद डी.आई.वाई. (DIY) ड्रोन किट को असेंबल किया और उसे हवा में उड़ाने का प्रत्यक्ष रोमांचक अनुभव लिया। इसके अलावा आर्डुइनो और माइक्रोकंट्रोलर कोडिंग (C++ और पाइथन प्रोग्रामिंग) की मदद से बच्चों ने दैनिक जीवन में काम आने वाले कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स जैसे— स्मार्ट नोटिस बोर्ड, आई.ओ.टी. स्मार्ट स्विच बोर्ड, वर्षा से सक्रिय कपड़ा सुरक्षा प्रणाली (Rain Sensor), स्मार्ट डोर लॉक एवं स्मार्ट ऊंचाई मापन प्रणाली का खुद निर्माण, परीक्षण और सफल प्रदर्शन किया।
पारंपरिक सम्मान के साथ समापन
इस सफल कार्यशाला के समापन अवसर पर स्टेम रोबो हब इंडिया के संस्थापक देवव्रत सिन्हा द्वारा डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल एवं श्रीमती उपमा तिवारी को विशेष रूप से 3डी प्रिंटेड श्री गणेश जी एवं श्री कृष्ण जी की अत्यंत सुंदर प्रतिमाएँ भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। वहीं विद्यालय प्रबंधन की ओर से देवव्रत सिन्हा को श्रीफल एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
स्कूल प्रबंधन और उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने कार्यशाला की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान से परे यह व्यावहारिक ज्ञान बच्चों के मानसिक विकास और तकनीकी सोच को एक नई दिशा देगा। प्रबंधन ने भविष्य में भी बच्चों के लिए ऐसी उन्नत तकनीकी कार्यशालाएँ लगातार आयोजित करने का सकारात्मक आश्वासन दिया है।








