सरगुजा में पत्रकारों और समाजसेवियों को निशाना बनाने की साजिश पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच की मांग
अम्बिकापुर (सरगुजा) – सरगुजा जिले में जनहित के मुद्दों को उठाने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्टों) और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ बढ़ती दुर्भावनापूर्ण शिकायतों और चरित्र-हनन के मामलों को लेकर पुलिस अधीक्षक (SP) सरगुजा को एक विस्तृत शिकायती आवेदन सौंपा गया है। आवेदन में पुलिस और आपराधिक कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए मामलों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की पुरजोर मांग की गई है।
निजी स्वार्थ और राजनीतिक प्रतिशोध के लिए कानून का दुरुपयोग
सौंपे गए पत्र में गंभीर चिंता व्यक्त की गई है कि पिछले कुछ समय से जिले में जनहित के मामलों पर मुखर रहने वाले व्यक्तियों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोधियों और निहित स्वार्थ रखने वाले लोगों द्वारा सोची-समझी साजिश के तहत पत्रकारों और एक्टिविस्टों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं। झूठी शिकायतें दर्ज कराकर पुलिसिया कार्रवाई का डर दिखाने और उनका चरित्र-हनन करने का एक ट्रेंड शुरू हो गया है, जो सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है।
सोशल मीडिया पोस्ट को आपराधिक साजिश बताना गलत
आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि समाज में घटित होने वाली घटनाओं को सामने लाना, उन पर टिप्पणी करना या सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करना एक सामान्य लोकतांत्रिक गतिविधि है। केवल इन सामान्य गतिविधियों के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र या गंभीर अपराध की कल्पना कर लेना पूरी तरह से अनुचित है। जब तक किसी मामले में वास्तविक कृत्य और ठोस साक्ष्य न हों, तब तक केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
सत्यता की जांच के बाद ही दर्ज हो FIR
पत्र में पुलिस प्रशासन से अपील की गई है कि किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करने से पहले घटना के समय, परिस्थिति और शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि की बारीकी से जांच की जाए। दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज कराई जाने वाली झूठी शिकायतों से न केवल निर्दोष व्यक्तियों की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता प्रभावित होती है, बल्कि इससे गंभीर अपराधों के वास्तविक पीड़ितों की आवाज भी कमजोर पड़ती है।
कानून का निष्पक्ष प्रवर्तन हो, दुर्भावनापूर्ण उपयोग नहीं
आवेदकों ने साफ तौर पर कहा है कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ संज्ञेय अपराध की विश्वसनीय सूचना या पर्याप्त कानूनी आधार है, तो अवश्य कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कानून का निष्पक्ष प्रवर्तन होना चाहिए, न कि इसका उपयोग किसी से व्यक्तिगत या राजनीतिक प्रतिशोध लेने के साधन के रूप में किया जाए। पुलिस की जिम्मेदारी केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और आरोपों की प्रकृति की गहराई से निष्पक्ष जांच करना भी है।



अम्बिकापुर (सरगुजा)







